Monday, November 15, 2010

The wait is On!

लिखना हमारा शौक है, इस तन्हाई का खौफ है
दिल पर लगे हैं पहरे, नज़रों पर भी रोक है!

जाने क्यों? दिल को किसी का इंतज़ार है
यार तो वैसे यारों, अपने भी हज़ार हैं...

पर ये दीवाना दिल ढूंढें है ऊन निगाहों को
जिनमे मेरे लिए बस मेरे इए ही प्यार है।

पर दर पल बढ़ जाती है - ये बेचैनी ये आरज़ू
मिलन की ये बेताबी; कब होगी वो रूबरू?

लाख समझाने पर भी दीवाना करता इंतज़ार है
उन चंचल निगाहों का जिनमे बस मेरे लिए प्यार है।

ना कुछ बोलता है, ना कुछ बतलाता है
अब तो ये दोस्तों, दोस्तों से कतराता है!

मनाता हु जब भी कभी तो कहता हर बार है-
''ना मुझको चैन ना मुझको करार है...
मुझे तो बस करना इंतज़ार है...
उन कातिल निगाहों का फ़िदा जिनपर जान है
जिनमे मेरे लिए ही प्यार का फरमान है!
बेसब्र होकर करना बस उसका इंतज़ार है
जिसकी निगाहों में मेरे लिए बस मेरे लिए ही प्यार है।"

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