Friday, January 21, 2011

देश प्रेम


पक्षी भी अपने जन्मस्थानों से प्रेम करते हैं,
दिन भर जहाँ चाहे उड़ते फिरते हैं ,
परन्तु संध्या होते ही अपने पंख फड़-फड़ाते हैं,
दूर-दूर दिशायों से अपने नीड़ो को लौट आते हैं

मनुष्य तो फिर भी विचारशील बुद्धिमान है,
फिर भी कहाँ उसे इस बात का ज्ञान है?
देश से व्यक्ति व्यक्ति से देश की पहचान है
देश प्रेम पवित्र सलिला भागीरथी के सामान है

जिसकी धूलि में लेट-लेट कर हैं हम पलें
जिसकी अतुल अंक में हमने हैं आवास लिया
उसकी सेवा से विमुख होना कृतघ्नता है कायरता है
देश हित में स्वांत हित की अनुभूति ही सच्ची मानवता है

साहचर्य प्रेम का प्रथम सोपान है, परिचय प्रेम का प्रवर्तक है
इस हेतु देश के स्वरुप से अभ्यस्त होना आवश्यक है
देश प्रेम है नहीं मात्र समृद्धि सम्बन्धी आंकड़ो का ज्ञान
देश प्रेम है 'त्याग के उत्साह' से देना अपना सर्वस्व बलिदान

देश प्रेमी देश के चरणों में सर्वस्व समर्पित करता है
देश हित के सुख-दुःख में उसका सुख-दुःख निहित रहता है
देश प्रेमी की अंतरात्मा स्वार्थ रहित होती है
हितचिंतन हितसाधन सच्चे देश प्रेमी की प्रवृत्ति है

ब्रज के करील कुंजों की खातिर
तीनो लोको का सिंहासन कुर्बान है
ऐसा प्रेम सच्चा देश प्रेम है
जिसके उदाहरण रसखान है

देश प्रेम का अर्थ नहीं प्राण न्योछावर करना
देश प्रेम का अर्थ नहीं देश के लिए मर मिटना
देश प्रेम का अर्थ है अपने कर्तव्य निभाना
देश की प्रत्येक वस्तु से नित्य प्रेम करते जाना!

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