Friday, November 11, 2011

Confusion and Clarification (Part-1) - कहा था किसी फकीर ने


One of my Hindu-Urdu creations...


एक बार फिर खुद को
उसी मोड़ पे खड़ा पाया है
अनजाने रास्तों से
आज फिर दिल घबराया है
 


सपने जो देखे खुली आँखों से
कुछ साकार, कुछ तार-तार हुए
क्या कहूँ किस कदर मुझे...
तकदीर ने आज़माया है!


वक़्त के ज़ालिम टुकड़ों में
बिखर गयी है ज़िन्दगी
इन्ही टुकड़ों ने मुझे
कभी हँसाया कभी सताया है


जब अपने बेगाने हुए...
गैरों ने साथ निभाया है
ज़िन्दगी के इस सफ़र ने मुझे
बहुत कुछ सिखाया है!


सोचता हूँ आज - ज़िन्दगी में मैंने...
क्या खोया क्या पाया है?
कल जो मेरा था कभी...
आज वो पराया है!


अब तो मुझे बस
खुद ही की तलाश है
कहा था किसी फकीर ने...
खुदी में खुदाया है!


कहा था किसी फकीर ने...
खुदी में खुदाया है! 
 


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