Saturday, November 12, 2011

Confusion and Clarification (part 2) - What is my Destiny? ऐ खुदा तू ही बता

 
 Another Hindi-Urdu Mix Poem I wrote in a state of dilemma

A Question that's always on my mind...
What is My Destiny?
Lord, Please Let Me Know!
आज की खबर नहीं
ना ही कल का ठिकाना है
भटके हुए इस मुसाफिर का
ये हसीन फ़साना है

कहीं तन्हाई, कहीं गम
कहीं खुशोयों का खज़ाना है
सिखा ज़िन्दगी से मैंने
सब को ही अपनाना है...

रास्ते तो बहुत हैं मगर,
किधर कदम बढ़ाना है?
मुसाफिर हूँ पर जानूँ ना
कहाँ मुझे जाना है...

डर नहीं मुझे तन्हाई का
ना मुश्किलों से घबराना है
पर जाऊँ तो जाऊँ किधर?
अब तक ये... न जाना है...

पूछता है दिल मेरा...
कहाँ मुझे जाना है?
क्या ज़िन्दगी का मकसद है?
क्या है जिसे पाना है?

कौन सी वो मंज़िल है...
जिसे मुझे पाना है?
ऐ खुदा तू ही बता...
कहाँ मुझे जाना है?

 
ऐ खुदा तू ही बता...

कहाँ मुझे जाना है?

2 comments:

  1. this is the ghist of human life.
    excellent thought.

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  2. Thanks for taking the timeout to read and comment... it inspires me to do better :)

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