Wednesday, December 28, 2011

Kuch Sawaal - A few Questions from my Heart!

वो लफ्ज़ कहाँ से लाऊँ, जो जज़्बात बयाँ कर पाएं ?
वो अल्फाज़ कहाँ  मिलेंगे दास्ताँ-ए-दिल जो कह जाएँ?

वो दावा कहाँ से  लाऊँ, दिल के ज़ख्म जिससे भर जाएँ?
क्या करे बन्दा उस हाल में, जब दुआ भी काम ना आये?

वो पल कैसे दोहराऊँ, हर पल यहाँ बिता जाए!
जो गुज़र गया है कल, क्यों है ज़हन में समाये?

वो नशा कहाँ से लाऊँ  जिससे दर्दे-दिल  मिट  पाए?
वो शीशा कहाँ मिलेगा, जो सिर्फ सच दिखलाए?



वो वफ़ा कहाँ से लाऊँ, जो धोखा ना दे जाए?
वो हमसफ़र कहाँ मिलेगा, हर सफ़र में साथ आये?

वो यार कहाँ से लाऊँ, जो बिन लफ़्ज़ों के समझ जाए?
वो प्यार कहाँ से लाऊँ, जो  जीवन भर साथ निभाए?

ऐ मेरे खुदा, दिल मेरा आज, चीख-चीख चिल्लाये...
कहता है क्यों ना तुझसे कुछ सवाल हो जाए?




अगर हम तेरे बन्दे हैं, तो क्यों तड़प कर जीते हैं?
क्यों वक़्त-वक़्त पर आंसू के, घूँट भी, हम पीते हैं?

जो बनाया हमें है - तुने  - अपने सदके में
फिर क्यों आज तुझसे अलग, होके हम जीते हैं ?

क्यों लड़ते हैं एक-दूजे से, आज तेरे नाम पे?
क्यों मंदिर-मस्जिद तोड़ कर, आज हम खुश होते हैं?

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