Sunday, August 10, 2014

Rashtriya Dhwaj - National Flag - Has a message for You!


हे! मानव, मैं राष्ट्र ध्वज, आज तुझसे ये कहने आया 
बहुत हुआ अब बंद कर! अपने ये कपट का साया!!

मुझे अपने फेसबुक/व्हाट्सएप्प अकाउंट पे धारण करने का तू हकदार नहीं 
देश-प्रेमी और तू? तू तो अपने समाज से ही वफादार नहीं!

कहाँ रहता है तू जब, इज़्ज़त मेरे बहनों की लूटी जाती है?
क्यों छुप जाता है तू तब, तब बेटियां गर्भ में मारी जाती हैं?





जब मरते हैं जवान मेरे, तू चैन के नींदें सोता है!
किसान मेरे भूके मरते, और तू "जंक फ़ूड" के लिए रोता है!

मात-पिता  आज मेरे, वृद्धाश्रम में जीतें हैं,
बच्चे मेरे अनाथ-आश्रम में,अपने ही आँसू पीते हैं 

फिर भी कभी भी तू यहां ना आता है..
२६ जनवरी, १५ अगस्त को फिर क्यों नारे लगाता है?

चुनाव होते हैं जब देश में , वाद-विवाद तू बहुत करता है 
फिर जाकर मत-दान केंद्र में जाकर, मतदान क्यों नहीं करता है?

न जवान, न किसान, न तू कोई सच्चा नेता है 
फिर क्यों लगाकर तस्वीर मेरी, लोगों को धोखा देता हैं ?

कुछ तो शर्म कर ऐ निर्दयी , कब तक ऐसे जी पायेगा ?
एक दिन ऐसे ही तेरा भी, अंत समीप आ जायेगा 

तब याद करेगा तू मेरी बातों को; तड़पेगा, पछतायेगा 
पर डूब चूका होगा सूरज तेरा, और तू कुछ नही कर पायेगा 

बहुत हुआ अब बंद कर, अपना ये छलावा 
देश-प्रेम नही है ये, ये तो है तेरा दिखावा 




हे! भारतीय, मैं राष्ट्र ध्वज, आज तुझसे ये कहने आया 
बहुत हुआ अब बंद कर! अपने ये कपट का साया!!

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