Saturday, December 12, 2015

I remember, don't you? - Abhay's Message for Naina.

याद है मुझे...

ज़माने को ठुकरा कर, तेरा मेरे पास आना
मेरे लिए तेरा, अपने दोस्तों से भी लड़ जाना

मेरा तेरे बालों को प्यार से सहलाना
और शर्मा के तेरा, अपनी नज़रें झुकाना 



मेरे साथ वो तेरा, उस रात 'तमाशा' जाना
'क्यों प्यार है तुम्हें मुझसे?' इसपर तेरा अड़ जाना

पहली बार जब मेरे लब तेरे लबों से टकराये थे
मुश्किल था हमारे लिए खुद को सम्हाल पाना 



हर बार मेरा तुझे, तेरे घर तक छोड़ने आना 
और तेरा ये कहना 'पहुंच कर मुझे बताना'

थक कर बैठा था जब मैं, और कुछ न खाया था 
अपने हाथों से तूने खिलाकर प्यार जताया था 

मेरे हाथों से तेरा, वो 'डेरी मिल्क सिल्क' छीन लेना
मेरे 'गुलाब-जामुन' में वो तेरा 'राजमा' मिला देना



मेरी हर चीज़ों पे तू अपना हक़ जताती थी
जो रूठ जाता मैं, तू 'चूम' कर मुझे मनाती थी


इतना प्यार तूने मुझपे न जाने कैसे बरसाया था
दिल मेरा जैसे जन्नत की सैर ही कर आया था

फिर हुआ कुछ यूं, जो प्यार में अक्सर होता है
इश्क़ में जुदाई का गम; हर आशिक ही रोता है 

याद है आखिरी रात भी, जब मुझसे तू मिलने आई थी?
किस तरह गुस्से में भी, मेरी बाहों में तू समाई थी?



तुझे भी याद है ना? जब तू मेरी बाँहों में होती थी?
रख सीने पे मेरे, अपना सर, तू चैन से सोती थी?

क्या भूल जाएगी तू, लम्हें जो साथ बिताये?
प्यार भरे वो पल में हमने सपने जो संग सजाए?

होते थे जब हम अलग लगता था हम अधूरे थे
साथ मिला जो एक दूजे का, तब हुए हम पूरे थे



याद है मुझे, हर बार तेरा वो इठलाना
गैरों के नाम पे, तेरा वो मुझको चिढ़ाना

हर बार मना करती थी तू, मुझसे मुलाक़ात को
फिर भी मिलने आती थी, मुझसे तू हर रात को

देखा है मैंने प्यार, तेरे उन दोनों नैनों में
नाम मेरा छुपा था तेरे हर अंग के गहनों में

कितने खूबसूरत थे वो पल हम जब साथ होते थे
दुनिया से बेखबर, एक दूजे में हम खोते थे




प्यार के इस रास्ते पे, दिमाग की बात न सुन नैना
पूछ ले, अपने दिल से एक बार, क्या है उसका कहना?

हाँ मैंने आखिरी दो दिनों में तेरा दिल दुखाया था
पर उसमें भी मैंने अपना प्यार ही निभाया था 

डर था मुझे, तू कुछ गलत न कर बैठे
इसलिए मैंने तुझे, तुझसे से ही  बचाया था

शायद तू सोचती होगी, मैं सिर्फ अपने बारे में था सोच रहा
पर तुझे भी है पता, मेरे लिए, मुझसे कभी तु अलग न रहा 

यकीन हैं मुझे तुझपर, और अपने प्यार पे
गुस्सा है तू मुझसे, पर तुझे भी मुझसे प्यार है

'दूसरा मौका' एक बार तूने मुझसे माँगा था
गलती हुई थी तुझसे, और तूने वो माना था

मैं भी फिर इंसान ही हूँ, गलतियां मैं भी कर जाता हूँ, 
जो दिल दुखाया है तेरा, मैं कहाँ चैन से जी पाता हूँ?

जानती है मुझे तू, जितना कोई और मुझे ना जानता
पागल हूँ तेरे लिए, बिन सोचे ही कुछ कर जाता हूँ

विनती है 'विनायक' से मेरी, ये सन्देश तुझ तक पहुंचाए
पढ़ कर यह कविता मेरी, तेरा चेहरा फिर से खिल जाए

माफ़ कर सके जो तू मुझको, खुशनसीब मैं कहलाऊंगा
वादा है मेरा  तुझसे, अब ये गलतियां नही दोहराऊंगा

लिखने को तो और भी बहुत कुछ है मगर, मेरी भावनाओं का ये सार है...
इंतज़ार है मुझे उस पल का, जब तू बोलेगी, "हाँ अभय, मुझे भी तुमसे प्यार है"


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